जालंधर शहर में चरमराती सफाई व्यवस्था और जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों को लेकर राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। क्षेत्रीय सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर जब चन्नी जालंधर के डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया और पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे, तो दोनों बड़े अधिकारी गायब मिले। प्रशासनिक अधिकारियों की इस गैरहाजिरी से नाराज सांसद चन्नी ने सरकार और अफसरों के रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए और मामले को विधानसभा स्पीकर के समक्ष उठाने की चेतावनी दी।
सांसद चन्नी ने शहर में फैली गंदगी का मुख्य कारण सरकार की गलत नीतियों को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर की सफाई का ठेका अगले 8 वर्षों के लिए लगभग 608 करोड़ रुपये में किसी बाहरी कंपनी को दिया जा रहा है, जिसकी टेंडर प्रक्रिया तक अभी पूरी नहीं हुई है। चन्नी ने तंज कसते हुए कहा कि स्थानीय व्यवस्थाओं को नजरअंदाज कर दिल्ली की कंपनियों को पंजाब में ठेके बांटे जा रहे हैं, जबकि धरातल पर शहर की सड़कों और गली-मोहल्लों में कूड़े का अंबार लगा हुआ है।
जालंधर के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों का जिक्र करते हुए चन्नी ने कहा कि वेस्ट हलके में लोग पीने के पानी और सीवरेज की समस्या से तरस रहे हैं। फंड मंजूर होने के बावजूद ट्यूबवेल लगाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं कराई जा रही, वहीं आदमपुर में ओवरब्रिज और सड़कों का निर्माण लटका हुआ है। कैंट समेत कई इलाकों में कूड़े के डंप पूरी तरह भर चुके हैं और जलभराव के कारण महामारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है, लेकिन सरकार पानी की निकासी के स्थायी समाधान पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
सांसद ने पंजाब सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के पास कर्मचारियों को डीए देने, पेंशन जारी करने और गांवों के विकास के लिए फंड उपलब्ध नहीं हैं। इसी वजह से आज पंजाब का हर वर्ग सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर है। मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा जुबानी हमला बोलते हुए चन्नी ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों और रेत से जुड़े कथित मामलों का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले धरने खत्म कराने के दावे करने वाली सरकार खुद भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ी है।

