पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और लुधियाना वेस्ट से विधायक संजीव अरोड़ा को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला करीब 100 करोड़ रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब इस मामले में संजीव अरोड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय की ओर से की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में हुई थी। जांच एजेंसी इस मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। करीब 100 करोड़ रुपये से जुड़े इस मामले में हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
अदालत में सुनवाई के दौरान बताया गया कि संजीव अरोड़ा की ओर से गुरुग्राम में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गठित विशेष अदालत में नियमित जमानत याचिका दायर की गई थी। यह याचिका 15 जून को खारिज कर दी गई थी। इसके बाद अरोड़ा ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया था। अब हाई कोर्ट से भी जमानत नहीं मिलने के कारण उन्हें राहत नहीं मिल पाई है।
सुनवाई के दौरान संजीव अरोड़ा की ओर से अदालत को बताया गया कि वह 9 मई से हिरासत में हैं। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हिरासत की अवधि समेत मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद उनकी कानूनी स्थिति पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
इस जांच का दायरा केवल संजीव अरोड़ा तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर और IAS अधिकारी बसंत गर्ग से भी हाल ही में पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
