पंजाब विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान उस समय माहौल गर्मा गया, जब नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पुलिस और विधानसभा स्टाफ पर कांग्रेस विधायकों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया। बाजवा का कहना है कि कांग्रेस विधायक सुबह साढ़े नौ बजे राज्य की कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विधानसभा के प्रवेश द्वार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे थे। इस विषय पर चर्चा कराने के लिए विधानसभा स्पीकर को दो ‘काम रोको प्रस्ताव’ भी भेजे गए थे, ताकि सदन में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बहस कराई जा सके।
प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस विधायक हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान विधायकों के साथ धक्कामुक्की की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि विधानसभा परिसर में प्रवेश के समय स्टाफ ने भी विधायकों के साथ अभद्र व्यवहार किया, जिससे कुछ नेताओं को चोटें भी आईं। धक्कामुक्की के दौरान विधायकों के कपड़ों तक पर हाथ डाला गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं और जनप्रतिनिधियों के सम्मान के खिलाफ है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा का संरक्षक स्पीकर होता है और उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्पीकर को दी। हालांकि, उनके मुताबिक इस मामले में कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रताप सिंह बाजवा ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे मुख्यमंत्री में “जनरल डायर की आत्मा” आ गई हो। बाजवा ने यह टिप्पणी करते हुए सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

