जालंधर में इमीग्रेशन एजेंट की कथित धोखाधड़ी और मनमानी के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (एकाग्र/कड़ियां) के नेताओं और पीड़ित परिवारों ने प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं और पीड़ित परिवारों ने ‘गुजराल इमीग्रेशन’ के दफ्तर के बाहर धरना दिया। आरोप है कि फर्म के मालिक ने स्टूडेंट वीजा के जरिए ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर करीब 11.5 लाख रुपये लिए, लेकिन न तो छात्र को विदेश भेजा गया और न ही रकम वापस की गई।
पीड़ित परिवार के सदस्य दरबार सिंह निवासी फाजिल्का ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे को ऑस्ट्रेलिया भेजने के लिए गुजराल इमीग्रेशन से संपर्क किया था। परिवार के पास करीब 32 लाख रुपये के जेन्युइन फंड और बैंक लोन की व्यवस्था थी।
आरोप है कि एजेंट ने फाइल में कमियां बताकर और अलग-अलग प्रक्रिया के नाम पर करीब 11.5 लाख रुपये अपने बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद करीब 6 महीने से एक साल का समय बीत गया, लेकिन छात्र को विदेश भेजने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और परिवार को कोई सकारात्मक जवाब भी नहीं मिला।
भारतीय किसान यूनियन के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट मनप्रीत सिंह संधू ने बताया कि पीड़ित परिवार पिछले कई महीनों से इमीग्रेशन दफ्तर के चक्कर लगा रहा है। उनके मुताबिक, बातचीत के बाद एजेंट ने 28 तारीख को मिलने का समय दिया था, लेकिन तय तारीख पर भी वह कथित तौर पर बहाने बनाकर मामले को टालता रहा।
यूनियन के पहुंचने से पहले ऑफिस बंद कर फरार होने का आरोप
यूनियन नेताओं के अनुसार, जब सदस्य और पीड़ित परिवार तीसरी बार इमीग्रेशन दफ्तर पहुंचे तो संचालक को उनके आने की जानकारी हो गई। आरोप है कि इसके बाद उसने ऑफिस बंद कर दिया और वहां से चला गया। लाइव लोकेशन के जरिए संचालक की लोकेशन जालंधर की मॉल रोड के पास मिली, जबकि फोन पर वह खुद को दिल्ली में होने की बात कह रहा था।
भारतीय किसान यूनियन (कड़ियां) के नेताओं ने पंजाब के युवाओं और किसानों से अपील की कि वे विदेश भेजने के नाम पर काम करने वाले एजेंटों की पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही कोई कदम उठाएं। यूनियन नेताओं ने कहा कि कई परिवार जमीन बेचकर या कर्ज लेकर बच्चों को विदेश भेजने के लिए पैसे जुटाते हैं, ऐसे में कथित फर्जी एजेंटों के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर गुजराल इमीग्रेशन के मालिक ने जल्द सामने आकर पीड़ित परिवार से बातचीत नहीं की और बैंक खातों के जरिए ली गई करीब 11.5 लाख रुपये की रकम वापस नहीं की, तो संघर्ष तेज किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर आरोपी के घर के बाहर भी पक्का धरना लगाया जाएगा और प्रशासन की मदद से कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

