आजकल बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बच्चे अक्सर देर रात तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ‘डिजिटल बेडटाइम’ का ट्रायल शुरू कर दिया है। इसके लागू होने के बाद रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच नाबालिगों के लिए ऐप एक्सेस पर रोक रहेगी। इसके साथ ही रात के समय और स्कूल के दौरान आने वाले नोटिफिकेशन्स को भी कम कर दिया जाएगा। जो प्लेटफॉर्म पहले यूज़र्स को खुद से चिपकाए रखने का काम करते थे, वे अब बच्चों का सोने का समय तय करने में मदद करेंगे।
नाबालिगों की सोशल मीडिया पर निर्भरता घटाने के लिए मेटा अपनी नीतियों में कई बड़े कॉस्मेटिक और तकनीकी बदलाव करने जा रहा है। नाबालिग यूज़र्स की पोस्ट पर लाइक और रिएक्शन की गिनती नहीं दिखेगी और कॉस्मेटिक-सर्जरी फिल्टर पूरी तरह बैन कर दिए जाएंगे। उम्र की पुष्टि करने वाले एज-एश्योरेंस सिस्टम और पेरेंटल कंट्रोल को और सख्त बनाया जाएगा। इसके अलावा, रील्स और फीड में लगातार आने वाले इनफिनिट-स्क्रॉल पर रुकावट डाली जाएगी। टीनएजर्स को एल्गोरिदम से चलने वाले फीड के बजाय नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का विकल्प मिलेगा, ताकि सोशल मीडिया की लत को कम किया जा सके। मेटा सेफ्टी के बारे में कोई गलत दावा नहीं करेगा और एक स्वतंत्र ऑडिटर इन नियमों के पालन पर नज़र रखेगा।
मेटा को इन कड़े फैसलों के साथ ही एक कानूनी लड़ाई के तहत भारी वित्तीय जुर्माना भी देना पड़ेगा। कंपनी से शुरुआती तौर पर लगभग 12.7 बिलियन डॉलर के भुगतान की उम्मीद है, जो बढ़कर 17.1 बिलियन डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। हालांकि, मेटा के साल 2025 के लगभग 201 बिलियन डॉलर के कुल राजस्व के मुकाबले यह राशि काफी कम मानी जा रही है। यह हर्जाना इस बात पर भी निर्भर करेगा कि टिकटॉक और यूट्यूब जैसे अन्य प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म इस अभियान में शामिल होकर आर्थिक सहयोग करते हैं या नहीं।
मेटा की इन नई नीतियों और जुर्माने के पीछे अमेरिका के 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा 2023 में दायर किया गया केस है, जो बाद में 47 राज्यों और अमेरिकी क्षेत्रों के एक बड़े गठबंधन में बदल गया। राज्यों ने आरोप लगाया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को जानबूझकर ऐसा बनाया गया था कि बच्चे और टीनएजर्स इसके आदी बने रहें। कंपनी को पता था कि इससे मानसिक और शारीरिक नुकसान हो रहा है, फिर भी वह जनता को गुमराह करती रही। 18 अगस्त से शुरू हुए ट्रायल के दौरान मेटा के पूर्व सेफ्टी इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही से कंपनी की स्थिति और असहज हो गई। बेजार ने अदालत में खुलासा किया कि मेटा का कल्चर सुरक्षा से ज्यादा रेवेन्यू और ग्रोथ को प्राथमिकता देता है, जिसके बाद मेटा को इन बदलावों के लिए मजबूर होना पड़ा।

