नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन के कारण बनी दो नई झीलों ने खतरा और बढ़ा दिया है। इनमें से एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अधिकारियों को दोबारा बाढ़ या भूस्खलन आने की आशंका सता रही है।
बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान को देखते हुए नेपाल सरकार ने 5 जिलों की 15 लोकल बॉडी को आपदा प्रभावित और इमरजेंसी क्षेत्र घोषित किया है। सरकार के मुताबिक, इन इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से चलाने के लिए यह फैसला लिया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के साथ-साथ संभावित खतरे वाले इलाकों पर लगातार नजर बनाए रखना है। नई झीलों में पानी के स्तर और आसपास की पहाड़ियों की स्थिति की भी निगरानी की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के पास पहाड़ों में बनी दूसरी झील को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। वैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल के अनुसार, झील में जमा पानी अस्थिर है और अगर इसका प्राकृतिक बांध टूटता है तो बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है। पहली झील का बांध शुक्रवार को टूट चुका है। ऐसे में अगर दूसरी झील भी टूट जाती है तो उसका पानी नीचे मौजूद पहली झील तक पहुंच सकता है। इससे दोनों झीलों का पानी एक साथ तेजी से नीचे की ओर आने का खतरा पैदा हो सकता है।
जेफ्री कार्गेल ने कहा कि रेस्क्यू टीमों को हर समय ऊंचे इलाकों में जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। दोनों झीलें नेपाल-चीन सीमा के उस क्षेत्र से ऊपर स्थित हैं, जहां बुधवार को आई भीषण बाढ़ में भारी जान-माल का नुकसान हुआ था। बाढ़ के साथ बहकर आया मलबा करीब 5 लाख बड़े डंप ट्रकों के बराबर था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्राकृतिक आपदा कितनी भयावह थी।
नेपाल और तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 633 हो गई है। वहीं करीब 2,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिकों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं, लेकिन नई झीलों के खतरे ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।

