पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मण के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में FIR दर्ज की है। FIR में राजबीर घुम्मण के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर, आर.एस. नागरा तथा कुछ अज्ञात सरकारी और निजी व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद हुई है, जिसमें CBI को मामले की जांच करने और FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
पंजाब में करीब 8 ठिकानों पर CBI की छापेमारी
FIR दर्ज करने के बाद CBI ने पंजाब में करीब आठ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस के अलावा राजबीर घुम्मण और मामले से जुड़े अन्य लोगों के परिसरों पर भी कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के मुताबिक मोहाली और खरड़ में नितिन गोहल तथा बीर देविंदर से जुड़े परिसरों पर भी CBI टीम पहुंची।
मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर और प्रशासनिक मंजूरियों में कथित तौर पर भ्रष्टाचार तथा प्रभाव के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने ED की ओर से साझा की गई सामग्री को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की जांच के लिए पर्याप्त माना था और CBI को दो महीने के भीतर जांच की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
CM मान ने CBI कार्रवाई पर उठाए सवाल
CBI की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे लेकर कड़ा विरोध जताया। मान ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए कर रही है। उन्होंने CBI की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए कहा कि पंजाब में आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा की ओर से सरकार को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि ये मुख्यमंत्री मान के राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
इस पूरे मामले में पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार का कहना है कि मामले में राज्य की एजेंसियों की भूमिका और जांच को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि हाईकोर्ट ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी को मामला सौंपा है। अब मामले की कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है।
