शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व जनरल सेक्रेटरी और वरिष्ठ पंथक नेता सरदार बीर सिंह का बीते दिनों निधन हो गया। उनके निधन से सिख जगत और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। समाज और पंथ के प्रति उनकी सेवाओं को याद करते हुए, उनके निमित्त अंतिम अरदास और कीर्तन 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे आयोजित किया जाएगा।
सरदार बीर सिंह केवल एक राजनीतिज्ञ नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सिख मूल्यों और मानवता की सेवा में लगा दिया। SGPC के महासचिव और धर्म प्रचार समिति के प्रधान के रूप में उन्होंने धार्मिक संस्थाओं को नई मजबूती प्रदान की। उनकी निर्भीक ईमानदारी और क्रांतिकारी सोच के कारण उन्हें हर वर्ग में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था।
उनकी प्रशासनिक कुशलता केवल धार्मिक संस्थानों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने सोसाइटी ट्रांसपोर्ट, दोआबा स्कूल और सहकारी कोल्ड स्टोर सोसाइटी के अध्यक्ष के रूप में सार्वजनिक सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही, ज्ञानी कोल्ड स्टोर और मध्य प्रदेश स्थित ज्ञानी फार्म्स के प्रबंध निदेशक के रूप में उन्होंने आधुनिक खेती और कृषि समुदायों के उत्थान के लिए असाधारण कार्य किए।
पवार परिवार के स्तंभ सरदार बीर सिंह ज्ञान और साहस के प्रतीक थे। उन्होंने अपनी उपस्थिति से कई पीढ़ियों को शक्ति और दिशा प्रदान की। उनकी विरासत केवल उनके कार्यों में नहीं, बल्कि उन मूल्यों में जीवित रहेगी जो उन्होंने संस्थाओं और समाज में स्थापित किए हैं। उनकी अंतिम अरदास में विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
