हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्ति की उपासना का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो रहा है, जो न केवल मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का समय है, बल्कि इसी दिन से हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत) का भी आरंभ होगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाली इस पूजा में कलश स्थापना, अखंड जोत और सात्विक जीवन का विशेष महत्व बताया गया है।
पंचांग गणना के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 18 मार्च 2026 की रात 11:39 बजे शुरू हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि की मान्यता के कारण घटस्थापना और पहला व्रत 19 मार्च को रखा जाएगा। कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 06:25 से 07:41 बजे तक रहेगा। जो लोग सुबह के समय व्यस्तता के कारण पूजा नहीं कर पाएंगे, उनके लिए दोपहर में ‘अभिजीत मुहूर्त’ का विकल्प भी उपलब्ध है, जो 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा।
नवरात्रि के दौरान शरीर और मन की शुद्धि के लिए खान-पान के सख्त नियमों का पालन किया जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अनाज (गेहूं, चावल), दालें, लहसुन, प्याज और मांसाहार का पूर्ण त्याग करना चाहिए। भोजन में केवल सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। फलाहार के रूप में कुट्टू का आटा, सिंघाड़ा, राजगीरा, आलू, लौकी और दूध से बनी चीजों का सेवन किया जा सकता है। शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए समय-समय पर फल, सूखे मेवे और भरपूर पानी पीना अत्यंत आवश्यक है।
शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा में कुछ सावधानियां बरतना अनिवार्य है। देवी भागवत पुराण के मुताबिक, मां दुर्गा को तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते, उन्हें लाल रंग के फूल, विशेषकर गुड़हल के फूल अत्यंत प्रिय हैं। पूजा में बासी फल या मुरझाए हुए फूलों का प्रयोग वर्जित माना गया है। इसके अलावा, कलश स्थापना के लिए कभी भी चटका हुआ या टूटा हुआ पात्र इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पूजा स्थल के पास चमड़े की वस्तुएं जैसे बेल्ट या पर्स रखना भी अशुभ माना जाता है।
व्रत के नौ दिनों में अक्सर लोग कमजोरी महसूस करने लगते हैं, इसलिए सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें और खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए नारियल पानी, छाछ या ताजे फलों के रस का सेवन करें। कैफीनयुक्त पेय पदार्थों और अधिक चीनी वाली ड्रिंक्स से बचना चाहिए, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी कर सकते हैं। यदि उपवास के दौरान चक्कर या अधिक थकान महसूस हो, तो तुरंत फलाहार लेकर आराम करना चाहिए।
