जालंधर की श्री बद्री केदार लंगर सेवा समिति (रजि.) की ओर से 21 अप्रैल 2026 से 30 मई 2026 तक बद्रीनाथ धाम में लगाए जाने वाले भंडारे की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी क्रम में आज समिति के पदाधिकारियों की देखरेख में भंडारे के सामान से भरे ट्रकों को रवाना किया गया।
ट्रकों को रवाना करने से पहले समिति के सभी सदस्यों ने सोढल मंदिर में हवन-यज्ञ और पूजा-अर्चना की। धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसके बाद भंडारे के लिए सामग्री भेजी गई।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री कृष्ण देव भंडारी, पार्षद अश्वनी अग्रवाल समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और सेवा कार्य के लिए समिति के प्रयासों की सराहना की।
समिति के चेयरमैन जनेश अरोड़ा और अध्यक्ष सजीव शर्मा ने बताया कि बद्रीनाथ धाम तक पहुंचने के लिए तीन प्रमुख मार्ग हैं—रानीखेत, कोटद्वार-पौड़ी (गढ़वाल) और हरिद्वार-देवप्रयाग मार्ग। ये सभी रास्ते कर्णप्रयाग में जाकर मिलते हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पंजाब के फाजिल्का से शुरू होकर बठिंडा, पटियाला, पंचकूला, पांवटा साहिब, देहरादून, ऋषिकेश, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली और जोशीमठ से होते हुए बद्रीनाथ धाम तक पहुंचता है और आगे माणा गांव तक जाता है।
पहले हरिद्वार से बद्रीनाथ धाम की यात्रा में महीनों का समय लग जाता था, लेकिन अब सड़क सुविधाओं में सुधार के चलते यह यात्रा तीन से चार दिनों में पूरी हो जाती है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिल रही है।
