जालंधर की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल और दिग्गज क्रिकेटर हरभजन सिंह जैसे बड़े चेहरों को अपने पाले में कर शहर के पावर सेंटर को पूरी तरह से हिला दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन दो प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी ने बीजेपी को जालंधर में एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की है। विशेष रूप से अशोक मित्तल की सक्रियता ने आगामी चुनावी दंगल के लिए पार्टी की जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है।
सांसद अशोक मित्तल ने हाल ही में हुए वेस्ट विधानसभा उपचुनाव के दौरान पर्दे के पीछे रहकर एक बड़ी भूमिका निभाई थी। उनके ठोस सांगठनिक कौशल और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत तालमेल के कारण बीजेपी अब इस क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक प्रभावी नजर आ रही है। माना जा रहा है कि मित्तल के आने से न केवल वेस्ट बल्कि जालंधर सेंट्रल के इलाकों में भी पार्टी को व्यापक मजबूती मिलेगी। उनके पास औद्योगिक घरानों से लेकर आम जनता तक पहुंचने का एक सफल ट्रैक रिकॉर्ड है, जिसका सीधा लाभ बीजेपी को भविष्य में मिलने वाला है।
अशोक मित्तल की पहचान सिर्फ एक राजनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सफल शिक्षाविद और उद्योगपतियों से गहरे संबंध रखने वाले व्यक्ति के तौर पर भी है। वे आने वाले समय में बीजेपी के लिए न केवल एक बड़े फंड मैनेजर की भूमिका निभा सकते हैं, बल्कि शहर के मध्यम वर्ग और कारोबारी जगत के बीच पार्टी की साख को और अधिक मजबूत करने का जरिया भी बनेंगे। व्यापारिक समुदायों के साथ उनके सीधे संपर्क ने बीजेपी के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं, जिससे विपक्षी दलों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
सियासी गलियारों में इस बात की भी जोरदार चर्चा है कि अशोक मित्तल की नजर अब शहर के मेयर पद पर टिकी हुई है। हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनकी बढ़ती सक्रियता इसी ओर इशारा कर रही है। दूसरी ओर, क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह की कुछ जिम्मेदारियों से दूरी ने भी चर्चाओं का बाजार गर्म कर रखा है। उनके इस रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, जो आने वाले दिनों में साफ हो सकती हैं।
एक तरफ बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत कर रही है, तो दूसरी तरफ ‘आप’ के अंदर सब कुछ ठीक नहीं लग रहा है। साल 2022 में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को किनारे किए जाने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कार्यकर्ताओं के बीच पनप रहा यह असंतोष अब धीरे-धीरे सार्वजनिक हो रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर सत्ताधारी दल ने समय रहते इस गुटबाजी को नहीं रोका, तो आने वाले नगर निगम और अन्य चुनावों में बीजेपी इन दिग्गजों के सहारे बाजी मार सकती है।
