जालंधर में स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। डिफेंस कॉलोनी से गड़ा रोड की ओर जा रही एक ओवरलोडेड मिनी बस को रेलवे फाटक से ठीक पहले ट्रैफिक पुलिस ने जांच के लिए रोका। बस के भीतर बच्चों की संख्या देखते ही मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। बताया जा रहा है कि इस मिनी बस में लगभग 30 स्कूली बच्चे ठसाठस भरे हुए थे, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ट्रैफिक पुलिस द्वारा की गई जांच के दौरान वाहन में कई गंभीर खामियां पाई गईं। बस में निर्धारित क्षमता से बहुत अधिक बच्चों को बैठाया गया था, जो सुरक्षा नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त वाहन पर अनिवार्य सरकारी नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ड्राइवर ने खुद सीट बेल्ट नहीं पहनी थी। कड़कती गर्मी के मौसम में बच्चों को इस प्रकार असुरक्षित ढंग से बस में सफर कराना किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता देने जैसा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने मौके पर ही बस का चालान काट दिया। हालांकि, उस समय पड़ रही भीषण गर्मी के चलते बच्चे बेहद परेशान और बेहाल हो रहे थे। अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मानवीय आधार पर चालान काटने के तुरंत बाद बस को बच्चों के साथ आगे जाने दिया। पुलिस का मानना था कि भीषण गर्मी में बच्चों को लंबे समय तक सड़क पर रोककर परेशान करना उचित नहीं था। अब इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत के माध्यम से की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर शहर में चलने वाली स्कूल बसों और वैनों की सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एक ही छोटे वाहन में करीब 30 बच्चों को भरना और बुनियादी सुरक्षा नियमों को पूरी तरह दरकिनार करना एक बेहद खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाती है। इस तरह की लापरवाही से स्कूली बच्चों के अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, जो हर दिन अपने मासूमों को इन वाहनों के भरोसे स्कूल भेजते हैं।

