पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना रुख साफ किया है। इस दौरान वित्त मंत्री हरपाल चीमा, कैबिनेट मंत्री बलजीत कौर और अमन अरोड़ा ने संयुक्त रूप से विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। मंत्रियों ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने कुल राजस्व का 51 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर खर्च कर रही है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने दावा किया कि पंजाब अपने कर्मचारियों को देश में सबसे बेहतर वेतन दे रहा है। उन्होंने कहा कि मूल वेतन और डीए मिलाकर पंजाब के कर्मचारियों की तनख्वाह हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से काफी अधिक है। इतना ही नहीं, गुजरात के कर्मचारियों के मुकाबले पंजाब के कर्मचारियों को करीब 28 प्रतिशत ज्यादा वेतन मिल रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि डीए को लेकर लगातार गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं। चीमा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जब उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब डीए 28 प्रतिशत था। सरकार ने इसे अक्टूबर में बढ़ाकर 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और नवंबर 2024 में 42 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। इसके बावजूद राजनीतिक फायदों के लिए मामले को तूल दिया जा रहा है।
पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि करीब ₹14,191 करोड़ का डीए बकाया 2016 से 2021 के बीच का है, जब राज्य में कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकारें थीं। मौजूदा सरकार इस पुरानी देनदारी को चुका रही है। इसके लिए हाईकोर्ट में दाखिल लिक्विडेशन प्लान को कोर्ट की मंजूरी मिल चुकी है और अब तक कर्मचारियों व पेंशनरों को ₹4,500 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

