पंजाब में सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर पंजाब साझा मुलाजिम मंच की अगुवाई में राज्य के क्लेरिकल स्टाफ ने सामूहिक छुट्टी लेकर विरोध जताना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के इस आंदोलन से सरकारी कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
सरकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना लागू करने, DA की बकाया राशि जारी करने और कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने समेत 14 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को लेकर सरकार के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है।
कर्मचारी अपने विरोध प्रदर्शन के तहत काले कपड़े पहनकर भूख हड़ताल भी करेंगे। यह विरोध मोहनजीत पर हुए हमले के मामले को लेकर भी जताया जा रहा है। कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर सरकार से उचित कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने से पहले ही कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा हड़ताल को लेकर चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण आम जनता को परेशानी होती है तो सरकार कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए मांगों का समाधान निकालने की अपील की थी।
अमन अरोड़ा के मुताबिक, जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए करीब 85 हजार कर्मचारियों का DA 42 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी किया जा चुका है। वहीं, बाकी कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान वेतन देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। उन्होंने कहा था कि सरकार कर्मचारियों के बकाये से इनकार नहीं कर रही है और इसके भुगतान के लिए योजनाबद्ध ढांचा तैयार किया गया है।
एक तरफ सरकार कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर बातचीत की अपील कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी अपनी 14 मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर रहे हैं। क्लेरिकल स्टाफ के सामूहिक अवकाश और प्रस्तावित भूख हड़ताल के बाद पंजाब में सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

