पंजाब के चर्चित 6 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स घोटाले की जांच कर चुके प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह राजनीति के मैदान में उतर आए हैं। वे खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ में शामिल हो गए हैं। चंडीगढ़ में अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की।
पार्टी में शामिल होने के बाद निरंजन सिंह ने स्पष्ट किया कि वे मूल रूप से राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं और न ही उनकी कभी राजनीति में आने की कोई इच्छा थी। उन्होंने समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में लोगों ने सवाल पूछने की आदत छोड़ दी है। लोग सिर्फ अपने निजी नफा-नुकसान तक सीमित होकर रह गए हैं, जिससे जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
निरंजन सिंह ने पंजाब की स्थिति पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में नशा और भ्रष्टाचार का माफिया चरम पर है, लेकिन कोई भी राजनीतिक चेहरा इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता खुद को जनता का सेवक मानने के बजाय मालिक समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब में व्यवस्था बदलनी है, तो आम लोगों को जागना होगा, सवाल पूछने होंगे और राज्य के सुनहरे भविष्य के लिए एकजुट होकर खड़ा होना होगा।
निरंजन सिंह अपने कार्यकाल के दौरान बहुचर्चित 6 हजार करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट की जांच को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। इसी हाई-प्रोफाइल मामले की पड़ताल करते हुए उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से लंबी पूछताछ की थी। मजीठिया से पूछताछ के कुछ ही समय बाद निरंजन सिंह के अचानक हुए तबादले पर भारी राजनीतिक बवाल और विवाद खड़ा हो गया था।
