पंजाब में ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ को पार्टी गठन के महज 4 दिनों के भीतर ही एक बहुत बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। गौरतलब है कि निरंजन सिंह बीती 23 सितंबर को ही इस राजनीतिक संगठन में शामिल हुए थे, लेकिन 27 सितंबर को उन्होंने पार्टी से अपनी राहें अलग कर लीं।
निरंजन सिंह ने अपने इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक का सहारा लिया। अपनी पोस्ट में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पंजाब में गहराई तक फैले नशे के कारोबार, सरकारी व प्रशासनिक भ्रष्टाचार, बढ़ते गैंगस्टर कल्चर, रंगदारी (जबरन वसूली) और ड्रग तस्करी में पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता जैसे गंभीर मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाने और सुधार लाने के मकसद से इस पार्टी से जुड़े थे।
इस्तीफे की वजह बताते हुए पूर्व ईडी अधिकारी ने लिखा कि कुछ बुनियादी और नीतिगत मुद्दों पर उनके विचार पार्टी के रुख से मेल नहीं खा रहे थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने सिद्धांतों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं कर सकते। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का आचरण और विचार भारतीय संविधान की मर्यादाओं और मूल्यों के पूरी तरह अनुरूप होने चाहिए।
निरंजन सिंह का पंजाब में एक कड़क और ईमानदार अफसर का रिकॉर्ड रहा है। वह जालंधर में ईडी के डिप्टी डायरेक्टर पद पर तैनात रह चुके हैं। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने बहुचर्चित जगदीश सिंह भोला ड्रग सिंडिकेट और उससे जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की गहन जांच की थी। इस हाई-प्रोफाइल जांच के दौरान उन्होंने पंजाब के कई दिग्गज और असरदार राजनीतिक नेताओं से लंबी पूछताछ की थी, जिसके चलते वे काफी चर्चा में रहे थे।
