लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुए विरोध प्रदर्शन और हिंसा का मामला अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई और आगे क्या कदम उठाए जाने हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 8 अक्टूबर को होगी।
याचिका में LPU में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा के साथ-साथ फगवाड़ा-जालंधर नेशनल हाईवे को कथित तौर पर लंबे समय तक जाम किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान नेशनल हाईवे को ब्लॉक किया गया, जिससे ट्रैफिक प्रभावित होने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी पैदा हुईं। यह रास्ता जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण रास्तों में शामिल है। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच पंजाब पुलिस के बजाय CBI से करवाने की मांग भी की है। हालांकि, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फिलहाल CBI जांच को लेकर कोई आदेश नहीं दिया है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एडवोकेट सत्यपाल जैन ने अदालत को बताया कि याचिका एक छात्र की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर एक कथित झूठी पोस्ट प्रसारित की गई थी।
इस पोस्ट में दावा किया गया था कि दो छात्राओं के साथ दुष्कर्म हुआ और उन्होंने आत्महत्या कर ली। इसके बाद यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन और हिंसा की स्थिति पैदा हुई। याचिका में आरोप लगाया गया कि हिंसा में कुछ छात्र शामिल थे, जबकि कुछ बाहरी लोग भी जीप और कारों में वहां पहुंचे थे।
एडवोकेट सत्यपाल जैन ने अदालत में यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान फगवाड़ा-जालंधर नेशनल हाईवे काफी देर तक बाधित रहा। याचिका में इस मार्ग को सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि हाईवे के बाधित होने से जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर असर पड़ा।
याचिकाकर्ता ने इस मामले में पंजाब पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग की है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि इसी तरह की एक घटना चितकारा यूनिवर्सिटी में भी हुई थी।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में केस दर्ज किया जा चुका है और पुलिस की ओर से जांच की जा रही है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा कि अगली सुनवाई के दौरान यह बताया जाए कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई, कौन-कौन लोग दोषी पाए गए और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। इसके साथ ही आगे की कार्रवाई को लेकर भी पूरी जानकारी अदालत के सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं।
