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स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर एक मिनट भी इंतजार न करें, हर सेकंड कीमती है : डॉ. संदीप गोयल

ByAdmin

Oct 29, 2026

यदि किसी व्यक्ति का अचानक चेहरा एक तरफ झुक जाए, हाथ या पैर में कमजोरी आ जाए या बोलने में दिक्कत होने लगे, तो परिवार के लिए यह बेहद चिंताजनक स्थिति हो सकती है। कई बार लोग इसे कमजोरी, थकावट या बढ़े हुए ब्लड प्रेशर का असर समझकर कुछ समय इंतजार करते हैं। लेकिन यह इंतजार मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकता है।

एन.एच.एस न्यूरोकेयर (NHS Hospital की एक यूनिट) के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट और डायरेक्टर डॉ. संदीप गोयल (डी.एम. न्यूरोलॉजी) ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि स्ट्रोक, जिसे आम भाषा में लकवा या अधरंग कहा जाता है, एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसके लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता लेना बहुत जरूरी है।

लकवे में हर मिनट क्यों महत्वपूर्ण है?

डॉ. गोयल के अनुसार, लकवा उस समय होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई रुक जाती है या दिमाग की कोई खून की नस फट जाती है। ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं (सेल्स) को नुकसान पहुंच सकता है।

लकवे के इलाज में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। कुछ मरीजों में समय पर अस्पताल पहुंचने पर थक्के (क्लॉट) को घोलने वाली दवाइयों के जरिए इलाज किया जा सकता है। कुछ चुनिंदा मरीजों में आधुनिक तकनीक की मदद से दिमाग की खून की नस में जमे थक्के को निकाला भी जा सकता है।

“लकवे के बाद मरीज कितनी जल्दी सही अस्पताल पहुंचता है, यह उसके इलाज और ठीक होने की संभावनाओं पर बड़ा असर डाल सकता है।” — डॉ. संदीप गोयल

इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें

डॉ. गोयल ने बताया कि हर व्यक्ति को लकवे के मुख्य लक्षणों के बारे में जानकारी होनी चाहिए:

  • चेहरा: अचानक चेहरे का एक तरफ झुक जाना या टेढ़ा होना।

  • हाथ-पैर: एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन आना।

  • बोलने में दिक्कत: बोलने में लड़खड़ाहट या दूसरे की बात समझने में परेशानी होना।

  • संतुलन: अचानक चक्कर आना, चलने में तकलीफ या शरीर का संतुलन बिगड़ना।

  • आंखें: अचानक एक या दोनों आंखों से देखने में परेशानी होना।

  • तेज सिरदर्द: अचानक बहुत तेज या असामान्य सिरदर्द होना।

इनमें से कोई भी लक्षण अचानक दिखाई दे तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें।

यदि कुछ मिनटों में लक्षण ठीक हो जाएं, फिर भी खतरा हो सकता है

कई बार मरीज का हाथ कुछ मिनटों के लिए कमजोर हो जाता है या बोलने में दिक्कत होती है, लेकिन थोड़ी देर बाद सब कुछ सामान्य महसूस होने लगता है।

डॉ. गोयल के अनुसार, यह T.I.A. (Transient Ischemic Attack) या ‘मिनी स्ट्रोक’ की चेतावनी हो सकती है। ऐसे लक्षण भविष्य में बड़े स्ट्रोक के खतरे का संकेत भी हो सकते हैं। इसलिए लक्षण ठीक होने के बावजूद तुरंत अस्पताल में जांच करानी चाहिए।

स्ट्रोक रेडी सेंटर में समय पर इलाज क्यों जरूरी है?

डॉ. गोयल ने बताया कि लकवे के मरीज को ऐसे अस्पताल पहुंचाना महत्वपूर्ण है, जहां बिना किसी अनावश्यक देरी के जांच और विशेषज्ञ इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हों।

एन.एच.एस अस्पताल, जालंधर में स्थापित ‘स्ट्रोक रेडी सेंटर’ इसी उद्देश्य के साथ काम कर रहा है, जहां 24 घंटे न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध हैं।

यहां मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाएं:

  • सी.टी. स्कैन और एम.आर.आई.

  • विशेष स्ट्रोक आई.सी.यू. (Stroke ICU)

  • न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों की टीम

  • आधुनिक डी.एस.ए. (DSA) और न्यूरो-इंटरवेंशन सुविधाएं

उचित मरीजों में थ्रोम्बोलिसिस और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी जैसी आधुनिक इलाज तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।

न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में 27 से अधिक वर्षों के अनुभव वाले डॉ. संदीप गोयल के नेतृत्व में ‘एन.एच.एस न्यूरोकेयर’ का उद्देश्य लकवे के मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सीय देखभाल उपलब्ध कराना है।

लकवा होने पर परिवार को क्या करना चाहिए?

डॉ. गोयल ने विशेष रूप से अपील की कि लकवे के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को घर में आराम करने के लिए न छोड़ें। मालिश, घरेलू नुस्खों या खुद से दवा देने में समय बर्बाद न करें। मरीज को कुछ भी खाने-पीने को देने से भी बचें, क्योंकि उसे निगलने में दिक्कत हो सकती है।

तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं और मरीज को स्ट्रोक के इलाज की सुविधा वाले अस्पताल पहुंचाएं। लक्षण कब शुरू हुए थे, यह समय याद रखें और डॉक्टर को जरूर बताएं।

डॉ. संदीप गोयल की लोगों से विशेष अपील

“अक्सर लोग लकवे के लक्षणों को पहचान नहीं पाते या यह सोचकर इंतजार करते हैं कि कुछ देर में मरीज ठीक हो जाएगा। लेकिन लकवे में यह देरी बहुत भारी पड़ सकती है। मेरी सभी परिवारों से अपील है कि चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या बोलने में तकलीफ को कभी भी मामूली न समझें। तुरंत इमरजेंसी में पहुंचे। समय पर लिया गया आपका फैसला किसी की जान बचाने और गंभीर विकलांगता के खतरे को कम करने में मददगार हो सकता है।”

डॉ. संदीप गोयल (डी.एम. न्यूरोलॉजी)

प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट एवं डायरेक्टर

एन.एच.एस न्यूरोकेयर (NHS Hospital की एक यूनिट), जालंधर

लकवे के लक्षण पहचानें। इंतजार न करें। तुरंत इमरजेंसी में पहुंचे।

एन.एच.एस अस्पताल — लकवे के मरीजों की देखभाल के लिए समर्पित अस्पताल

📞 8196946333

क्योंकि हर सेकंड रिकवरी की दिशा बदल सकता है।

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