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LPG संकट : भारत में गैस की सप्लाई सीमित, उद्योगों और होटलों पर असर

ByPunjab Khabar Live

Mar 10, 2026

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में कुकिंग गैस (LPG) की सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। गैस शिपमेंट में देरी के कारण देश में गैस की किल्लत पैदा हो गई है। स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फिलहाल कॉमर्शियल गैस की सप्लाई रोक दी गई है। इस फैसले से इन राज्यों में होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है और कई जगहों पर कारोबार ठप होने की आशंका जताई जा रही है।

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण भारत आने वाली LPG की खेप प्रभावित हो गई है। भारत में आने वाली ज्यादातर LPG सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है। हालिया हालात में यह समुद्री रास्ता बाधित हो गया है, जिसके कारण गैस शिपमेंट में देरी हो रही है और घरेलू बाजार में इसकी कमी महसूस की जा रही है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने देश में गैस की सप्लाई को रेगुलेट करने के लिए ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955’ लागू कर दिया है। इसके तहत गैस की उपलब्धता और वितरण को प्राथमिकता के आधार पर तय किया जाएगा ताकि जरूरी सेक्टरों को पहले गैस मिल सके।

  • पहली कैटेगरी में घरेलू उपयोग की रसोई गैस (PNG) और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG शामिल है। इनकी सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी।
  • दूसरी कैटेगरी में खाद बनाने वाली फैक्ट्रियां शामिल हैं। खेती के लिए जरूरी खाद उत्पादन को ध्यान में रखते हुए इन्हें कम से कम 70 प्रतिशत गैस दी जाएगी, लेकिन फैक्ट्रियों को यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल केवल खाद बनाने में ही किया जा रहा है।
  • तीसरी कैटेगरी में नेशनल ग्रिड से जुड़े बड़े उद्योग आते हैं, जिनमें चाय फैक्ट्रियां और अन्य बड़े औद्योगिक यूनिट शामिल हैं। इन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से करीब 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी।
  • चौथी कैटेगरी में छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट शामिल हैं। शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े इन कारोबारों को भी उनकी पुरानी खपत के आधार पर करीब 80 प्रतिशत गैस सप्लाई दी जाएगी।

गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल मुख्य रूप से रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी, ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।

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