भारतीय शेयर बाजार के लिए यह साल किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है। साल के शुरुआती ढाई महीनों में ही निवेशकों को पिछले कई सालों की तुलना में सबसे करारा झटका लगा है। वैश्विक अनिश्चितताओं और लगातार जारी बिकवाली ने बाजार को घुटनों पर ला दिया है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक निवेशकों की करीब 533 अरब डॉलर, यानी लगभग 48.5 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति डूब चुकी है। गिरावट का यह स्तर इतना गंभीर है कि इसकी तुलना 2011 के दौर से की जा रही है, जब बाजार ने 625 अरब डॉलर की गिरावट झेली थी। मौजूदा स्थिति ने पिछले एक दशक के भरोसे को हिलाकर रख दिया है।
भारतीय बाजार में आई इस गिरावट की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह नुकसान कई देशों के कुल मार्केट लॉस के योग से भी अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में हुआ यह घाटा मेक्सिको, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, फिनलैंड, वियतनाम और पोलैंड जैसे देशों के संयुक्त बाजार नुकसान को भी पीछे छोड़ चुका है।
भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप अब गिरकर 4.77 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर आ गया है। यह अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। साल 2026 के आगाज़ पर यह आंकड़ा 5.3 ट्रिलियन डॉलर के करीब था, जिसका सीधा अर्थ है कि मात्र 75 दिनों के भीतर बाजार पूंजीकरण में 10 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
