अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में रहने वाले दो भारतीय मूल के भाइयों, भास्कर सवानी और अरुण सवानी को अमेरिकी अदालत ने ऐतिहासिक सजा सुनाई है। दोनों भाइयों पर करीब एक दशक तक कंपनियों और डेंटल क्लीनिकों का एक जटिल जाल बुनकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का दोष सिद्ध हुआ है।
इस पूरे घोटाले में उनकी सहयोगी अलेक्जेंड्रा ओला राडोमिक को भी दोषी पाया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग की इस कार्रवाई ने प्रवासी भारतीयों के बीच हड़कंप मचा दिया है क्योंकि सजा की अवधि (835 साल) अमेरिका के न्यायिक इतिहास की सबसे कठोर सजाओं में से एक मानी जा रही है।
सवानी ब्रदर्स पर मुख्य रूप से हेल्थकेयर और H-1B वीजा से जुड़े गंभीर घोटाले करने के आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने अमेरिका की सरकारी स्वास्थ्य योजना ‘मेडिकेड’ को करीब 3 करोड़ डॉलर यानी भारतीय रुपयों में लगभग 250 करोड़ रुपए का चूना लगाया। आरोपियों ने न केवल उन इलाजों के बिल सरकार को भेजे जो कभी किए ही नहीं गए थे, बल्कि मरीजों की जान जोखिम में डालकर बिना मंजूरी वाले और असुरक्षित डेंटल इम्प्लांट भी लगाए। इसके अलावा, विदेशी कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल होने वाले H-1B वीजा नियमों के साथ भी बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की गई।
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, यह गिरोह पिछले 10 सालों से सक्रिय था और एक सुनियोजित तरीके से अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे हड़प रहा था। अदालत ने मामले की गंभीरता और धोखाधड़ी के स्तर को देखते हुए दोनों भाइयों को ऐसी सजा दी है जो आने वाले अपराधियों के लिए एक मिसाल बनेगी। 835 साल की जेल की सजा यह सुनिश्चित करती है कि इन भाइयों का बचा हुआ जीवन सलाखों के पीछे ही बीतेगा। इस फैसले को अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली और आव्रजन नियमों की सुरक्षा के प्रति एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
