स्मार्ट सिटी जालंधर में अपराध और चोरी की वारदातों का ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस प्रशासन के सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ाते हुए बेखौफ अपराधियों ने इस बार शहर के अति-सुरक्षित माने जाने वाले पॉश इलाके जेपी नगर को अपना निशाना बनाया। हैरत की बात यह है कि यह वारदात पंजाब के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के निवास स्थान के ठीक सामने अंजाम देने की कोशिश की गई, जहां चौबीसों घंटे सुरक्षा का कड़ा पहरा रहता है। हालांकि, क्षेत्रवासियों की मुस्तैदी और शोर मचाने के कारण अपराधी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके और वाहन छोड़कर फरार हो गए।
पीड़ित कार मालिक और सब्जी मंडी के व्यापारी अमित के अनुसार, वह रोजाना की तरह अपनी आई-20 कार घर के बाहर खड़ी करके सोए थे। देर रात लगभग 2 बजे पड़ोसियों ने उन्हें फोन पर सूचना दी कि उनकी गाड़ी में संदिग्ध लोग घुस गए हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला कि चोर खुद भी एक आई-20 कार में सवार होकर आए थे। वारदात से पहले तीनों आरोपियों ने लगभग 10 मिनट तक आपस में बातचीत की और फिर रणनीति बनाई। इसके बाद दो आरोपी कार में बैठे रहे, जबकि एक बाहर निकला और उसने पीड़ित की कार का शीशा और लॉक तोड़ दिया।
शातिर चोरों ने गाड़ी को स्टार्ट करने के लिए उसके डैशबोर्ड के नीचे से तारों को डायरेक्ट जोड़ने का प्रयास किया। जब गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई, तो वे उसे धक्का देकर आधी सड़क तक घसीटते हुए ले गए। इसी बीच इलाके के लोगों की नजर उन पर पड़ गई और उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। निवासियों को एकत्र होता देख चोर घबरा गए और अपनी गाड़ी में बैठकर मौके से नौ दो ग्यारह हो गए। स्थानीय निवासी संजीव ने बताया कि यदि पड़ोसियों ने समय पर सतर्कता न दिखाई होती, तो आरोपी गाड़ी ले जाने में सफल हो जाते।
घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। देर रात पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन केवल औपचारिक मुआयना करके सुबह कार्रवाई करने की बात कहकर चले गए। पीड़ित और स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के 12 घंटे बीत जाने और अगली दोपहर 12 बजे तक भी कोई पुलिस अधिकारी तफ्तीश के लिए मौके पर नहीं पहुंचा।
निवासियों का कहना है कि पुलिस का रवैया बेहद ढीला है और अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि ‘कार तो चोरी नहीं हुई है’। जबकि सीसीटीवी फुटेज में चोरों की गाड़ी का नंबर साफ नजर आ रहा है, इसके बावजूद पुलिसिया कार्रवाई में देरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

