बांग्लादेश में बीते दो सप्ताह से जारी कोटा विरोधी हिंसक प्रदर्शन से देश में अब हालात काबू से बाहर चला गया है. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में मची उथल-पुथल को देखते हुए अपने सभी विदेश के दौरान रद्द कर दिए हैं. वहीं भारत सरकार पड़ोसी देश में फंसे भारतीय छात्रों को बाहर निकलने के लिए हर जतन कर रही है, अब तक करीब 100 स्टूडेंट्स स्वदेश पहुंच चुके हैं, जबकि लगभग 4 हजार छात्र अभी भी बांग्लादेश में फंसे हुए हैं.
विदेशी मीडिया एजेंसी असोसिएट प्रेस (AP) के अनुसार गुजरते दिन के साथ और ज्यादा हिंसक होते जा रहे कोटा विरोधी प्रदर्शन को देखते हुए अब पुलिस ‘देखते ही गोली मारने का आदेश’ लागू कर रही है. बांग्लादेश की राजधानी ढाका समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है, पुलिस और सैन्य बलों की टुकड़ियां सड़कों पर मार्च कर रही हैं. बांग्लादेश के सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी के महासचिव और विधायक ओबैदुल कादिर ने कहा कि कर्फ्यू रविवार सुबह 10 बजे तक जारी रहने की उम्मीद है. स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया जा रहा है कि बांग्लादेश के 64 में से 47 जिलों में हिंसा हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में अब तक कुल 105 लोगों की जान चली गई है, जबकि 1500 से अधिक घायल हुए हैं. इसके साथ ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के चलते प्रधानमंत्री शेख हसीना के विदेशी राजनयिक दौरे को रद्द कर दिया है.
पीएम हसीना की सरकार ने पूरे बांग्लादेश में राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की है और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्य बलों की तैनाती का आदेश दिया है. इसके अलावा शेख हसीना सरकार ने परिसरों को बंद करने और विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए राजधानी भर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू लगाने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्य बलों की तैनाती की घोषणा के बीच 978 भारतीय छात्र घर लौट आए हैं. बता दें कि प्रदर्शनकारी बांग्लादेश में कोटा प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ देश के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले दिग्गजों के परिजनों के लिए 30% आरक्षण आवंटित किया गया था. उनका मानना है कि कोटा प्रणाली भेदभावपूर्ण है और इससे हसीना के समर्थकों को फायदा होता है, जिनकी अवामी लीग पार्टी ने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था.
