जालंधर। आम आदमी पार्टी की सरकार में “भ्रष्टाचार खत्म” और “कानून सबके लिए बराबर” जैसे दावे ज़मीन पर खोखले साबित होते दिख रहे हैं। जालंधर के जेपी नगर इलाके में जिस तरह से अकाली दल से जुड़े एक प्रभावशाली नेता की मार्केट खड़ी हो गई, उसने न केवल नगर निगम बल्कि राज्य सरकार की नीयत पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जेपी नगर में पहले दुकानों का निर्माण हुआ, और फिर नियमों को ताक पर रखकर दूसरी मंजिल तक तैयार कर ली गई, जबकि क्षेत्र में इस तरह के निर्माण की अनुमति ही नहीं है। हैरानी की बात यह है कि न तो निगम की ओर से कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही निर्माण रोकने के आदेश ज़मीन पर लागू हुए।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नगर निगम कमिश्नर अकाली दल के नेता का साथ दे रहे हैं? या फिर आप सरकार में भी वही पुराना “राजनीतिक संरक्षण” वाला खेल चल रहा है?
मामला अब दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक पहुंच चुका है। सरकार के भीतर ही यह चर्चा तेज है कि किस तरह आप सरकार के कार्यकाल में अकाली दल के नेता की मार्केट धड़ल्ले से बन गई, और निगम प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि आम नागरिक अगर एक ईंट भी बिना नक्शा पास करवाए रख दे तो नोटिस और चालान थमा दिए जाते हैं, लेकिन यहां पूरी मार्केट और दूसरी मंजिल खड़ी हो गई—वो भी बिना डर के।
