मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की लपटें अब डिजिटल दुनिया तक पहुंचने लगी हैं। भारत सरकार ने देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों और अंडरसी केबल बिछाने वाली संस्थाओं को संभावित जोखिमों का आकलन करने के कड़े निर्देश दिए हैं। समुद्र के नीचे बिछी ये केबल्स वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक की रीढ़ मानी जाती हैं, और युद्ध के कारण इनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। सरकार ने कंपनियों से इमरजेंसी बैकअप प्लान तैयार रखने को कहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में कनेक्टिविटी बरकरार रखी जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ भारत के लिए सामरिक और डिजिटल दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत का लगभग एक-तिहाई डेटा ट्रैफिक इसी समुद्री रास्ते से होकर अमेरिका और यूरोप तक पहुँचता है। यदि इस क्षेत्र में केबल्स को कोई नुकसान पहुँचता है, तो इसका सीधा असर भारत की इंटरनेट स्पीड और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर पड़ेगा। रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और टाटा कम्युनिकेशंस जैसी दिग्गज कंपनियाँ इस नाजुक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
