सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को एक अहम फैसला लेते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद उच्च सदन में AAP की स्थिति कमजोर हो गई है, जबकि बीजेपी की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
इस फैसले के बाद राज्यसभा में AAP के सांसदों की संख्या घटकर महज 3 रह गई है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है, जिससे पार्टी की स्थिति और मजबूत हो गई है।
जिन सात सांसदों के विलय को मंजूरी मिली है, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अब इन सभी को बीजेपी के सदस्य के रूप में दर्शाया गया है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने रविवार को सभापति से इन सातों सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी। पार्टी का आरोप था कि यह दलबदल कानून का उल्लंघन है। संजय सिंह ने सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इन नेताओं ने पार्टी छोड़कर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
