पंजाब के नूरपुरबेदी क्षेत्र में स्थित साऊपुर (बड़ीवाल) गांव के रहने वाले किसान कुलविंदर सिंह की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। खेती-किसानी में व्यस्त रहने वाले कुलविंदर सिंह के लिए वह दिन सामान्य दिनों जैसा ही था, जब वे नूरपुरबेदी में छोले-भटूरे का लुत्फ उठाने पहुंचे थे। पेट की भूख मिटाने निकले कुलविंदर को शायद अंदाजा भी नहीं था कि उस दिन उनकी किस्मत का सितारा बुलंदियों पर होगा।
छोले-भटूरे खाने के बाद जब उन्हें कुछ खुल्ले पैसों की जरूरत महसूस हुई, तो वे पास ही स्थित ‘शुक्ला लॉटरी स्टॉल’ पर पहुंच गए। यहां महज 200 रुपये खर्च कर उन्होंने पंजाब सरकार की मासिक लॉटरी का एक टिकट खरीद लिया। यह फैसला पूरी तरह से अचानक और अनौपचारिक था, जिसे वे केवल समय बिताने या पैसों की अदला-बदली के नजरिए से देख रहे थे।
भाग्य की विडंबना देखिए कि जिस टिकट को उन्होंने सामान्य समझकर खरीदा था, उसी ने उन्हें रातों-रात करोड़पति बना दिया। जब लॉटरी का ड्रा निकला, तो स्टॉल के मालिक चंद्र प्रकाश शुक्ला ने खुद उन्हें फोन कर प्रथम पुरस्कार जीतने की सूचना दी। जैसे ही कुलविंदर सिंह को पता चला कि उन्होंने डेढ़ करोड़ रुपये जीत लिए हैं, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
इस सफलता से कुलविंदर सिंह और उनके पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। एक साधारण किसान के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की यह राशि उनके जीवन की दिशा बदलने के लिए काफी है। भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए कुलविंदर ने बताया कि वे इस पुरस्कार राशि का उपयोग अपने परिवार की भलाई और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए करेंगे, ताकि उनके परिवार का जीवन स्तर और अधिक बेहतर हो सके।
