पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा में शामिल हुए चार साल बीत चुके हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें कोई जिम्मेदारी या लाभ नहीं मिला। कैप्टन के मुताबिक भाजपा पंजाब की तासीर और जमीनी राजनीति को पूरी तरह नहीं समझती, इसी कारण इतने लंबे समय में पंजाब से जुड़े मुद्दों पर उनसे एक बार भी सलाह नहीं ली गई। उन्होंने सांसद अमृतपाल सिंह की रिहाई का समर्थन करते हुए यह भी कहा कि लंबे समय तक जेल में रहने से व्यक्ति की लोकप्रियता और अधिक बढ़ती है।
पंजाब की मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए कैप्टन ने कहा कि राज्य में शासन व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है और हर कोई अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान की आलोचना करते हुए कहा कि वे एक मुख्यमंत्री की तरह गंभीर काम करने के बजाय स्क्रीन पर कलाकार ज़्यादा नज़र आते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि पंजाब में नशे का कारोबार लगातार पांव पसार रहा है, किसान सरकार से असंतुष्ट हैं और युवाओं में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।
वर्ष 2027 के आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव पर बात करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि राज्य में भाजपा के लिए गठबंधन बेहद जरूरी है। यदि पार्टी सत्ता में आना चाहती है तो उसे अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ दोबारा हाथ मिलाना होगा, क्योंकि दोनों दल पहले भी मिलकर सरकार चला चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा के पास दूसरा विकल्प अकेले चुनाव लड़कर लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने का इंतजार करना ही बचेगा। वहीं ‘वारिस पंजाब दे’ के साथ किसी भी तरह के समझौते से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि उसकी विचारधारा भाजपा से मेल नहीं खाती।
अपने लंबे राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कैप्टन ने कहा कि वे 1967 से राजनीति में हैं, दो बार मुख्यमंत्री, छह बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। मुझे भाजपा में शामिल होने के फैसले पर कोई अफसोस नहीं है। कांग्रेस में वापस जाने की अटकलों पर उन्होंने साफ कहा कि उनका गांधी परिवार से काफी समय से कोई संपर्क नहीं हुआ है और निजी संबंध अपनी जगह हैं, लेकिन कांग्रेस में लौटने का उनका कोई इरादा नहीं है।
भविष्य में भाजपा सरकार बनने पर मुख्यमंत्री पद स्वीकार करने के सवाल पर कैप्टन ने इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया। अपनी 84 वर्ष की आयु का जिक्र करते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का उदाहरण दिया जो 92 साल की उम्र में देश के प्रधानमंत्री बने थे। उनके इस जवाब से साफ संकेत मिलता है कि उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं किए हैं।
