अब मानहानि व अस्पताल को सील करने के लिए याचिका दायर करने की हो रही तैयारी
दुर्भावनापूर्ण इरादे व बुरी नीयत से धरना लगाने जैसे लगाए थे गंभीर दोष
जालंधर में अग्रवाल लीवर एंड गट सुपर स्पैशिलिटी अस्पताल के मालिक डा. मनीष अग्रवाल द्वारा साल 2022 में शहर के एक आरटीआई एक्टिविस्ट व गौ-भक्त अभिषेक बख्शी के खिलाफ दायर की गई एक याचिका को माननीय अदालत ने खारिज कर दिया है। इस संबंधी मीडिया को जानकारी देते हुए अभिषेक बख्शी ने कहा कि शहर के रिहायशी इलाके में अवैध रूप से बनाए गए अग्रवाल अस्पताल को लेकर उनकी तरफ से नगर निगम में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। इस अवैध निमार्ण को लेकर न केवल उन्होंने बल्कि कई अन्य लोगों के साथ-साथ इलाका निवासियों ने भी विरोध जताया था। मगर अपनी ऊंची पहुंच, रसूख, पैसों की ताकत व तगड़ी सैटिंग के चलते वह इन सभी शिकायतों के दबाने में कामयाब हो गए थे। जिसके बाद उनकी तरफ से माननीय अदालत में क याचिका दायर की गई थी, जिसमें उनके ऊपर दुर्भावनापूर्ण इरादे व बुरी नीयत से धरना लगाने जैसे गंभीर दोष लगाए गए थे।
मगर माननीय अदालत में लगभग 2 साल तक चले इस केस में वह न तो कोई सबूत ही पेश कर पाए और न ही अपने आरोपों को सिद्द करने के लिए कोई गवाह ही प्रस्तुत कर पाए। माननीय अदालत द्वारा कई अवसर दिए जाने के बाद भी जब अग्रवाल अस्पताल की तरफ से अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, तो पिछले साल दिसंबरं महीने में माननीय अदालत ने उक्त याचिक को खारिज कर दिया।
मुझे न्यायप्रणाली पर पूर्ण विश्वास, मानहानि एवं अस्पताल को सील करने के लिए दायर करूंगा याचिका – अभिषेक बख्शी
मीडिया से बात करते हुए अभिषेक बख्शी ने कहा, कि उन्हें न्यायप्रणाली पर पूर्ण विश्वास है, इसीलिए वह सच्चाई के लिए आवाज बुलंद करने में कभी भी गुरेज नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए सारे आरोप झूठे व बेबुनियाद थे। अग्रवाल अस्पताल ने उन्हें ब्लैकमेलर भी कहा था और इस याचिका से उनकी सामाजिक छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया गया था। जिसे व किसी कीमत पर बर्दाशत नहीं करेंगे। जल्दी ही वह माननीय अदालत में डा. मुनीश अग्रवाल के खिलाफ मानहानि का एक दावा करने के साथ-साथ उनके अवैध बने हुए अस्पताल को सील करने के लिए भी याचिका लगाएंगे। ताकि इस तरह से कानून तोड़ने वाले अन्य लोगों को भी सबक प्राप्त हो सके।
