पंजाब में 8 जिलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई और आम आदमी पार्टी सरकार से जुड़े लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के मामले में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई है। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें CBI को मामले की जांच कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 9 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार से जुड़े लोगों पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI से जांच कराने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक CBI को जांच पूरी कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। इसी आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के सामने सूचीबद्ध थी। सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि मामले को अब अगले दिन लिया जाएगा। मामले की फाइल जस्टिस शील नागू के पास देर से पहुंची है, इसलिए उन्हें इसे पढ़ने और मामले को समझने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से किसी भी जल्दबाजी वाली कार्रवाई के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करने का अनुरोध किया। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि जब दूसरे न्यायाधीश को मामले की फाइल पढ़ने का अवसर ही नहीं मिला है, तो ऐसी स्थिति में अंतरिम आदेश कैसे पारित किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दिया है। अब पंजाब सरकार की याचिका पर 9 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस सुनवाई में हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश पर रोक लगाने की पंजाब सरकार की मांग पर अदालत आगे विचार कर सकती है।
