महिला चेहरे पर भी लगाया जा सकता है दांव
जालंधर के मेयर को लेकर आम आदमी पार्टी के बीच मंथन चल रहा है। मेयर बनने की दौड़ में कई नेता हैं। पर फिलहाल पार्टी मेयर बनाने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं कर रही है और सोच-विचार के साथ ही फैसला लेगी। वहीं महिला चेहरे को लेकर भी विचार किया जा रहा है। पार्टी के नेता मेयर को लेकर लगातार सीनियर नेताओं को अपनी रिपोर्ट दे रहे हैं। मेयर बनने की रेस में ये नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
अश्विनी अग्रवाल रेस में आगे
वार्ड 80 से पार्षद बने अश्विनी अग्रवाल मजबूत दावेदार हैं। वह तीन साल से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। पार्टी का एक धड़ा उनका समर्थन भी कर रहा है। अग्रवाल ने जीतने के बाद वार्ड से अपने होर्डिंग्स उतरवाए थे। गन मेटल की औद्योगिक इकाई चलाने वाले अश्विनी अग्रवाल (47) पार्टी के लोकसभा प्रभारी भी हैं। अग्रवाल व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए उनका राजनीति में प्रवेश सभी के लिए, यहां तक कि उनके परिवार के लिए भी एक सरप्राइज था।
विनीत धीर मजबूत दावेदार
विनीत धीर चुनाव से ठीक पहले आप में शामिल हुए, मगर मेयर की रेस में उनका नाम भी लिया जा रहा है। हालांकि उनके मेयर बनने से पार्टी में नाराजगी के सुर भी सुनने को मिल सकते हैं। क्योंकि इससे आप के वह वर्कर और नेता नाराज हो सकते हैं जो सालों से पार्टी में काम कर रहे हैं।
अमित ढल्ल का लगा जोर
जालंधर नार्थ से पार्टी के विधायक उम्मीदवार दिनेश ढल्ल के भाई अमित ढल्ल का नाम भी इस दौड़ में शामिल है। अमित ढल्ल पहले भी काउंसलर रह चुके हैं। हालांकि दिनेश ढल्ल विधानसभा चुनाव हार गए थे। अमित ढल्ल वार्ड-24 से कौंसलर चुने गए हैं।
क्या बनेगी पहली महिला मेयर
इस बार 85 में से 44 पार्षद महिलाएं हैं। आप के पास 16 महिला पार्षद हैं। अगर पार्टी महिला मेयर बनाने पर विचार करती है तो अगर पार्टी किसी महिला को मेयर बनाने पर विचार करती है तो पार्टी के पास कई नए और कुछ अनुभवी चेहरे भी हैं। बस उनकी दावेदारी पर एक ही सवाल है वो ये कि वह पार्टी में चुनाव से पहले ही शामिल हुई हैं। अरुणा अरोड़ा के पास बाकी पार्षदों से अधिक तजुर्बा है।
महिला, हिंदू, सिख और दलित चेहरे में कोर्डिनेट करना होगा
मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के बीच पार्टी महिला, सिख और दलित चेहरे के बीच तालमेल बैठाना चाहेगी। क्योंकि अगर पिछले नगर निगम के मेयरों की बात करें तो उन सभी पार्टियों ने यह फॉर्मूला अपनाया था, ताकि सभी कम्यूनिटी का ध्यान रखा जाए। कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए महिला, हिंदू, सिख, दलित वर्ग का आपस में तेलमेल बैठाना होगा।
