भारत और कनाडा में तनाव के बीच बड़ी खबर आई है। कनाडा ने इस साल करीब 40 प्रतिशत भारतीय छात्रों के वीजा आवेदनों को रद्द कर दिया है। कनाडा की ओर से रद्द किए गए सभी देशों के वीजा आवेदनों में ये आंकड़ा सबसे ज्यादा है। ज्यादातर आवेदनों को रद्द करने के पीछे की स्पष्ट वजह भी नहीं बताई गई है। कनाडा के गैर-लाभकारी मीडिया संगठन इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म फाउंडेशन ने ये जानकारी दी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जनवरी, 2022 से 30 अप्रैल, 2023 के बीच कनाडा के आव्रजन विभाग ने कनाडाई कॉलेजों में प्रवेश के लिए स्वीकृत 8,66,206 छात्र आवेदकों में से 4,70,427 को (54.3 प्रतिशत) को वीजा जारी किया।
टोरंटो बिजनेस कॉलेज के सबसे ज्यादा (51 प्रतिशत) आवेदकों को वीजा जारी किया गया। इसके बाद कॉन्स्टोगा कॉलेज (51 प्रतिशत), नियाग्रा कॉलेज (42.6 प्रतिशत) और सेंट क्लेयर कॉलेज (42 प्रतिशत) आवेदकों को वीजा मिला। जुलाई से अक्टूबर 2023 के बीच पढ़ाई के लिए कनाडा में आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है। इस अवधि में 87,000 भारतीय छात्रों ने छात्र वीजा के लिए आवेदन किया, जो पिछले साल इसी अवधि में 1,46,000 हजार थे। इमीग्रेशन, रेफ्यूजीस एंड सिटिजनशिप (IRCC) कनाडा के मुताबिक, 2022 में 3,63,541 भारतीय छात्रों ने आवेदन किया था, जबकि अक्टूबर 2023 तक 2,61,310 छात्रों ने आवेदन किया।
दरअसल, 1 जवनरी से कनाडा ने भारतीय छात्रों के लिए गारंटीड इंवेस्टमेंट सर्टिफिकेट (GIC) की सीमा बढ़ा दी है। इसके तहत छात्रों को पहले अपने खाते में 16 लाख रुपये जमा रखने होते थे, जिसे अब बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे कनाडा में पढ़ाई के इच्छुक छात्रों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ा है। बता दें कि GIC के तहत एक साल तक छात्र को अपने रहने का खर्च कवर करने की गारंटी देनी होती है। 2013 से लेकर अब तक कनाडा में छात्र वीजा पर आने वाले विद्यार्थियों की संख्या 3 लाख से बढ़कर 9 लाख पर पहुंच गई है। केवल भारत से ही करीब 2 लाख छात्र कनाडा पढ़ने जाते हैं। कनाडा के कॉलेजों और सरकार के लिए ये राजस्व का बड़ा स्त्रोत है। कनाडा को इन छात्रों से करीब 18 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से करीब 2 लाख लोगों को इनसे रोजगार भी मिलता है।
